मधुबनी पेंटिंग
📌बिहार के मिथिला क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण कला परंपरा है। यह चित्रकला अधिकतर महिलाओं ने बनाई है और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करती है।1960 में, जीनोने मधुबनी जिले के एक साध्वी, स्वर्गीय महासुन्दरी देवी, से रंगीन चित्रकला का परिचय लिया। महिलाएं इस कला को अपनाने लगीं, और आज यह कला पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
बिहार की चित्रकला दरभंगा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी और नेपाल के कुछ हिस्सों में प्रसिद्ध है। प्रारंभिक रूप से रंगोली के रूप में विकसित होने के बाद यह कला धीरे-धीरे कपड़ो, दीवारों और कागज पर उतर आई है। मिथिला की महिलाओं द्वारा शुरू की गई घरेलू चित्रकला आज पुरुषों द्वारा भी अपनाई जाती है। मधुबनी रेलवे स्टेशन की दीवारों में मिथिला पेंटिंग कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मधुबनी और मिथिला पेंटिंग का सम्मान बढ़ाने के लिए 10,000 फुट प्रति फिट में मिथिला पेंटिंग की कलाकृतियों को लगाया। उनकी यह कार्रवाई रूप में नहीं हुई, बल्कि निःशुल्क हुई। विदेशी सैनिकों और पर्यटकों ने श्रमदान से निर्मित इन अद्भुत कलाकृतियों को बहुत पसंद किया।
